दोहा : धन चाहे तो धर्म कर, मुक्ति बे भज राप। हाड मांस का पुतला, बिना भजन किस काम ।।

भजन- 241

टेक :- सन्त रंग में रंगज्या, चल सन्तां के द्रबार है।

1. उड़ै सुन सन्तां का नारा, नहीं राम भजनिया हारा। हिरणाकुश पापी मारा, दिया दिखा न्यू सच्चा प्यार है।

2. ये कभी नहीं घबराते, सही एकवचन अपनाते। ये जपते और जपाते, रहैं दुख ओटन नै त्यार है।

3. लिया हरि कीर्तन गाना, त्यागा सै अन्न का खाना। नहीं खुन का टोपा पाना, चाहे करो सिंगो की मार है।

4. फिर आग्या जिकर बधाई, नहीं पास में पावै पाई । चाहे ले लो तलाशी भाई, ये खड़े देन नै तैयार हे।

5. महाबीर बता क्यं ठुकराई, सन्त कालेज की इसी पढ़ाई । हो दिन-दिन कला सवाई, अब थारै सै अखितयार है।  

भजन-242

टैक:- ये सतगुरु का दरबार है यहां सदाब्रत भंडार है। आकै दर्शन कर प्यारे यहां राम नाम का प्रचार है।।

1. शक्ति बाण चलैं सत्संग में सुरती यहा पर आया करै दोष जो सच्चे दूर हो ज्या जो सच्चे मन से चाहया करें जैसा तेरा विचार है , वैसा ही फल तैयार है।। आकै दर्शन.....

2. भीड़ रहै मेरे उन भाइयों की जो बाहर से आते हैं ण्श प्रसन्न होकर जाते देखे रोग खत्म हो जाते हैं। ऐसे ये दातार हैं, दूर करें अन्धकार हैं।। आकै दर्शन...

3. गली पवित्र गाम पवित्र बना दिये ब्रहाज्ञानी ने । घर-घर में खुशबोई कर दी ऐसे सच्चे ध्यानी ने। करी सत्संग की भरमार है, पणवासी शनिवार है।। आकै दर्शन...

4. शर्मा का सिरताज शिरोमणी सतगुरु चन्द्रभान रटो। हरि ओम सत्‌ बोलो और मुरली वाला श्याम रटो। होता बेड़ा पार है, कहै सनतों का परिवार है।। आकै दर्शन...

भजन-243

 टेक:- आज्या तेरा सिर पुचकारूं बाल भक्त ब्रह्मचारी रै, हे रै चन्द्रभान।

1. 10 साल की करी सेवा तनै जो खाली नहीं जा सकती । ऊंचा दर्जा पावै मेरे तैं पूरी हो तेरी धक्ति। आवागमनतैं पैंडा छूटे मिल ज्यागी तने मुक्ति। देख के नवघा भक्ति दर्शन आन देवें गिरधारी रै, हे रै चन्द्रभान।

2. भक्त जगत का बैर कहैं मत किसे मूर्ख तैं फहना। साँच के आँच नहीं लगती ये सत्पुरुषों का कहना। भक्ति चीज अनूठी सै तेरा या हे बनज्या गहना। दुनिया के में सम्भल कै रहैना परीक्षा लेबें नर नारी , हे रै चंद्र्भान।

3. शक्ति पैदा हो तेरे में है बमभाता शक्ति पैदा में इंश्वर के गुण गाने हैं। भक्ति में दिल लागे तेरा हिलैगा नहीं हिलाने तैं ी धाम तेरा त्रिवेणी बनज्या पाप दूर हों आने तैं। तेरे दर्शन पाने तैँ सबकी होज्या दूर बीमारी है, हे रै चन्द्रभान।

4. राम नाम के रटने वाला हो हकदारी तेरा। महाबीर भी सेवक हो जिसने पाछे पाट्या बेरा। हरि भजन की माला हो गल में नाम रटैगा तेरा। रोशन होज्या नाम तेरा तनैं पूजै दुनिया सारी तर, हे रै चन्द्रभान।

दोहा : दुख में सुमरिन सब करें, सुख में करे न कोय। जो सुख में सुमरिन करै, दुख काहे को होय।।

भजन-244

(मन बैठज्या भजन में छोड़ मेर दे रै)

1. तनै कटदे कोन्या करा विचार, ये दस कर का दे तेरी हार करका दे न मनका डार, मन की फेर दे रै।

2. तेरा नहीं होगा मन का चाहा, तन्नै गंदगी का ढेर लगाया ओम नाम करै सफाया, झाड़ू फेर दे रै।

3. तनै खूब करी मन मरजी, धर्म तज्या ना आत्मा बरजी पहुँचें धर्मराज घर अरजी, नीचे गेर दे रै।

4. महाबीर पहुँच गिरावड़ गाम, जहां है सतगुरु जी का धाम। तेरी गाड़ी का पहिया जाम, सतगुरु फेर दे रै।  

भजन-245

( तर्ज : रट राम नाम )

टेक:- सत्‌ ओम नमः, मैं रटूं हो तुम्हें, मेरे सतगुरु चन्द्रभान, करो मुझ सेवक का कल्याण।

1. सदाचारी ब्रह्मचारी मैं ध्यान तुम्हारा लाता हूं। सकल देव दिये छोड़ गुरु जी तेरे ही गुण गाता हूं। तुम हो माली इस उपवन के मैं छोटा सा पाता हूं। दया दृष्टि फेरो गुरु जी और नहीं कुछ चाहता हूं। कैसे ध्याऊं, हर दम गाऊं, मैं सतगुरु के गुणगान, करो मुझ सेवक का कल्याण।

2. हर दम घिरे हुये रहते तुम सन्तों के परिवार में। कष्ट खत्म सच्चा दिल ले जो आया तेरे दरबार में । मेरे रोग दोष को खत्म करो गुरु बाणी की तलवार में। मनै दास चरण का समझ लियो मैं फिरता हूं अन्धकार में। कैलाशी तुम्ही, अविनाशी तुम्ही, तुम्हीं हो विष्णु भगवान, करो मुझ सेवक का कल्याण।

3. जन्म फल उस जननी के जो जनमी है ऐसी शक्ति । धन्य भाग उस भूमि के जहां होती है ऐसी भक्ति । फिर भी मृग ज्यों बण-बण डोलै जोत जमा जड़ में जगती। या दुनिया पागल मैं कहै पर पागल है दुनिया लगती। जो जगत बनावै, उस तै बैर लगावै, तेरी नादानी नादान, करो मुझ सेवक का कल्याण ।

4. कृष्ण लाल शुद्ध ख्याल राखिये होज्या बेड़ा पार तेरा। ही गुरु चन्द्रभान के मन्दिर के में हो ज्यागा उद्धार तेरा। फेर पीछे तैं रोवैगा जब छुट जावै परिवार तेरा। ये धर्मराज के दूत मुअतिल का ल्यावैं अखबार तेरा। धर्म करें तैं, शुभ कर्म करें तैं, बनै अगम लोक अस्थान, करो मुझ सेवक का कल्याण ।

दोहा: तन से सेवा कीजिए, मन से भले विचार। धन से इस संसार में, निशदिन पर उपकार।॥।

भजन-246

 टेक:- उनका के कर ले संसार, जिनका राम रूखाला हो।

1. के रहगी थी कसर विन में, भक्त बिठा दिया बीच अग्न में । वो सीले हो गये सभी अंगार, मरग्या मारण आला हो ।

2. सीता कैद पड़ी रावण की, वा देखे बाट राम आवण की। जिन से गये थे देवता हार, उनकै भी भिड़ गया ताला हो।

3. कंस ने भर लिया घड़ा पाप का, छीन लिया था मी बाप का। आये चक़ सुदर्शन धार, कर दिया कंस का गाला हो।

4. कलियुग में हुई मीराबाई, खूब जगत की ठोकर खाई। उसने मिल गये कृष्ण मुरार, हुआ हृदय उजियाला हो।

5. चन्द्रभान सन्त जी की बाणी, मुक्ति मेवा जै हो खानी। रटलो ने सच्चा करतार, ले के गुरु जी पै माला हो।  

भजन-247

 टेक : राम कहूं घनश्याम कहूं या चन्दा कहूं के भान तनै। दर्शन दे के करे पवित्र दुनिया के इन्सान तनै।।

1. के विष्णु अवतार धार तुम दुख का नाश करन आले। के ब्रह्मा वरदान देनियां भव से पार करन आले। नहीं जीते कभी मरण आले के मौत जीत ली आन तनै।।

2. कामदेव को जीत लिया के शिव शंकर कैलाशी है। बाइस साल अन्न खाया कोन्या या के बात जरा सी है। के पार लगानी कांशी है के करा धर्म उत्थान तने ।।

3. बहुत से दुःखी जगत जीवों की करी आन कै गति तनै। के दुनिया में राक्षस बढ़गे आना पड़ग्या जती तनै। साथ रहन की मति तनै के धारी सै हनुमान तनै ।।

4. बहतरणी नदिया से गुरु जी -म्प्प्य ही पार लगाओगे। कृष्ण के हृदय में आन के कद लय सुर तैं गाबोगे। कद सत्‌ की जोत जगाओगे रटता गुरु चन्द्रभान तनै।।  

भजन-248

 टेक : गुरु चन्द्रभान ब्रह्चचारी, करें दुखियों की दूर बीमारी। सबका हो कल्याण यहां, आता सकल जहान यहां ।।

1. बाला जी की तरह मेला लगता शनिवार ने। सैयद भूत प्रेत रोक दिये भक्ति नै कार में । धार में जो आज्या आगै, समझ लो भाग सही जागै, लागे ना पल की बारी ।।

2. गुंगे, बहरे, अन्धे यहां पर ठीक हो लिये। सतयुरु के दर पै आके पट हृदय के खोलिये। टोह लिये गिरावड़ का रस्ता, जहां एक दीप है चसता, जिसकी चमक दूर तक जारी ।।

3. एक डंडे में तीन रंग है पीला, लाल, हरा। हो जाते भयवान असुर जब कन्यै जा धरा। भरा रहै भक्तों का-दरवार यहा पर होती जय जयकार, घी धूप दीप रहे जारी ।।

4. सत्संग मंडल सेवा करता आकै देखले | रोग करेंगे तेरे सत्संग में जाकै देखले ! टेकले सुरती होज्या निहाल, कह गिरावड़ का कॄष्ण लाल गुरुओं का दास पुजारी ।।  

भजन-249

 टेक : समझ बिना मनुष्य तेरी गलती, भजन बिन व गुजारा हो,

1. बहुत सो लिया इब तो जाग, पड़ा क्यूं मोह माया ने त्याग, हवा बिना आग नहीं बलती, बड़ा चाहे कौड अंगारा हो।

2. भक्ति कर लग रहा तेरा दाव, सीधा मुक्ति पद को पाव। जल बिन नाव नहीं चलती, मल्लाह बिना नहीं किनाणा हो।

3. खोल दे लग रही गाँठ भ्रम की, नाम दवाई तेरे रै मरहम की धरम की बेल फलै फलती, पाप सिर बोझा भारा हो।

4. इब तो चेत ले रे मति मंद, तुझको रहना है दिन चंद। अजरानंद उम्र ढलती, श्री कृष्ण का प्यारा हो। समझ बिना...

दोहा: - प्रेम बिना धीरज नहीं, विरह बिना वैराग। सतगुरु बिन जातै नहीं, मन मनसा के दाण।।  

भजन-250

टेक:- मेरा कोई ना सहारा बिन तेरे, चन्द्रभान गुरु जी ओ मेरे।

1. तजे मात पिता और भ्राता, मनै तुम संग जोड़ा हो नाता। गुण गाऊं मैं शाम सवेरे, चन्द्रभान गुरू जी ओ मेरे।

2. तुम दीनों के हितकारी, मैं दीन दु:ख्री ओ बड़ा भारी! तुम ने मेटे कष्ट भतेरे, चन्द्रभान गुरू जी ओ मेरे।

3. मझ्दार में डोलै नैया, बन जाओ गुरु जी खिबैया। काटो काल जाल के घेरे, चन्द्रभान गुरु जी ओ पेंरे।

4. मैं ढूंदू मथुरा कांशी, मैं तो तेरे चरणों की ओ दासी। मैं दूंढ़त फिरू चौफेरे, चन्द्रभान गुरु जी ओ मेरे।

5. ढूंढ़ा हरिद्वार कनखल में, हर व्ही गैड़ी और गंगा जल में। थारे सत्संग के में डेरे, चन्द्रभान गुरु जी ओ मेरे। मेरा कोई ना सहारा बिन तेरे, चन्द्रभान गुरु जी ओ मेरे।

दोहा:- धन्य मातु पितु धन्य हैं, धन्य सुदद अनुरक्त। धन्य ग्राम वह जानिये, जहां जन्में गुरु भक्त ।।