भजन-211

( तर्ज:- मैं किस विध देखण जाऊं )

टेक :- तेरी कटज्या अमर बीमारी, बहना प्यारी हे सत्संग में।

1. ये तीनों ताप सतावँ ना हे बहना, ठग पांचों धोरे आवैं ना हे बहना। ये आप मान जां हारी, बहना प्यारी है.

 2. तेरा कटज्या फंदा फांसी का, फांसी का, टंटा मिटै चौरासी का, चौरासी का। तनै होज्या सुख सा भारी, बहना प्यारी है.

3. आनन्द ले हरि रस में हे, रस में है, तेरे दसों होजां बस में हे, बस में हे। या चौंध टूटज्या सारी, बहना प्यारी है...

4. जै राम नाम जा गाया हे, गाया है, या सै अनमोली माया हे, माया हे। तू ले ने लूट पुजारी, बहना प्यारी है.

5. चन्द्रभान सन्त का कहना है, कहना है, जै चाहबै सुख से रहना हे, रहना है। तू भजले कृष्ण मुरारी, बहना प्यारी है-- तेरी कटज्या अमर बीमारी...  

दोहा:- दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान। तुलसी दया न छोड़िये, जब लग घट में प्राण ।।

भजन-212

( तर्ज:- सादा )

 टेकः- हिम्मत का हो राम हिमाती बिगड़े काम समरगे। परम गति मिलगी उनने जो भजन हरि का करगे।।

1. पांच वर्ष की उमर ध्रुव की बिल्कुल ना घबराया। नारद पै गुरु मंत्र ले कै आसन सही जमाया। श्रद्धा और विश्वास राख था सच्चा ध्यान लगाया। सुनी भक्त की टेर मेहर कर हरि ने दर्श दिखाया। खुद विष्णु भगवान आन कै हाथ शीश पे धरगे।।

2. प्रहलाद भक्त ने ज्यान हूम दी हर की महिमा गाई। हिरनाकुश के जुलमां तै नहीं काया थी थर्राई। ताते खम्ब कै टपपट गया ना बिल्कुल दहशत खाई। नरसिंह रूप बना प्रभु ने आके करी सहाई। राम भजनियां खुश होगे सब देख के पापी डरगे॥।

3. रैदास, कबीरा, मीरा, सहजो, गनका पार उतारी। कुब्जा, राधा, रुकमण की दी काट सभी बीमारी । सदन कसाई नन्दा की थी मेटी विपता सारी। अजामेल को नारायण खुद आ देगे गिरधारी। नरसी की जब टेर सुनी खुद भात आन के भरगे।।

4. चंद्र्भान संत का कहना हो ज्या मनसा पूरी हरि भजन मै ध्याउ जमा ले तज दे सब मगरुरी हरि भजै सो हर का हो ना रहती बिल्कुल दूरी करी कमाई आगै आवै मिलज्या खरी मजुरी हरि ओम का नाम रटनिया परले पार उतरगे

भजन-213

 ( तर्ज:- सत्संग के मां चल के बहना )

टेक:- भजन कीर्तन सत्संग करके, तेरा हो ज्यागा कल्याण। हे सुन बहना मेरी, ला हरि ओम में ध्यान।।

1. सीता राम चाहे राधेश्याम कहै, है नाम हरि सुखदाई। सौदा सस्ता साफ हो रस्ता, है अगत की खास कमाईं। वा पार उतरगी मीरांबाई, यो जानै जगत जहान।।

2. भीड़ पड़ी में मिलै सहारा, द्रोपदी की लाज बचादी । सच्चा प्रेम देख भिलनी का, आ घर पै अपर, श्यान दिखा दी। वा गनका अहिल्या पार लंघा दी, न्यूं कहते वेद पुराण।

3. भगवान भक्त के वश में हों सैं, ना हम ढंग निराला। तिलक करा कुढ्जा पै खुश हो, था देखनिए हैरान। रुकमण को आ आप सम्भाला, में लावे। हुए देखनिये हैरान।

4. चन्द्रभान सन्त की बाणी, जो ध्यान कष्ट मि्टवै। टोहया जिसने पाया बहना; और कि दें भगवान। बोल सुनै जब भाज्या आबे,; खुद दर्शन दे भगवान ।  

दोहा:- सत्संग सेवा साधना, सत्पुरुषों का संग । ये चारों करते तुरन्त, मोह निशा का भग।।

भजन-214

( तर्ज:- सादा )

टेकः:- सन्तों के सत्संग में चल कै हो ज्यागा कल्याण। जितने पैर जमीं पर धरते वह होते यज्ञ समान ।।

1. गाम गिरावड़ आकै देख एक सादा सा ब्रह्मचारी मर पांच वर्ष की उमर में जिसने भक्ति लागी प्यारी । दादा रामकिशन के चेले हैं चन्द्रभान पुजारी । लाला नेकी राम के बेटे बूली है महतारी । मन के दोष मिटैंगें सारे देख सन्त की श्यान।।

2. चौबीस घण्टे हनुमान की जोत अखंड है जलती। रामायण और गीता सुन यहां आनन्दी सी खिल्नती । ब्रह्मा विष्णु महादथ की शक्ति सन्त को मिलती । दसों इन्द्री हैं काबू नहीं पेश पांच की चलती। श्याम बसै हृदय अन्दर रहे हरि भजन में ध्यान।।

3. चांदरायण ब्रत किए और मौन एक साल पुगाया। नमक मिर्च बिन मीठे के घास पुबाड़ ही खाया। भादवा सुदी ग्यास का दिन सम्बत्‌ बत्तीस बताया। जब से अन्न का टाला दूध और फल पै टिक रही काया। हंस सुखी मन जीते हो न्यूं कहते बेद पुराण ।

4. शनिवार और पणवासी ने जो रोगी यहां थे आवें। श्रद्धा और विश्वास राख सत्संग में ध्यान जमाबैं। भूत प्रेत सन्त के आगै नाक रगड़ कै जाबें। अपनी युक्ति से कर मुक्ति तन के ताप मिटावें। गुदड़ी के मां लाल देख सब करते जां गुणगान।।

5. सत्संग की आधी घड़ी हों तप के वर्ष हजार। फिर भी बराबर नहीं तुलै यह सनतां किया विचार। चन्द्रभान सन्त की माया होती अपरम्पार। करले गात पवित्र नहा यहां बहती गंगा धार। भगतां के वश रहा करें यहां देख लिए भगवान।।

भजन-215

 ( तर्ज:- सब मिल कै मेरे साथ )

टेक:- बड़े भाग से होता है दीदार सन्तों का। सेवा बिन नहीं मिलता सच्चा प्यार सनतों का ।।

1. सन्त हरि के जामन होते हर इनका प्यारा। युक्ति से मुक्ति कर दें यह भेद बता सारा । इस दुनिया से है न्यारा करतार सनतों का।।

2. बहतरणी से पार होन का ये साफ करें रस्ता। करके सत्संग आध घड़ी भरलों ला । लूटो सौदा सस्ता खुला बाजार सन्तों का ।।

3. रोग दोष सब मिट जाते इनके दर पै आकै। भूली वस्तु लखा देवें यह साफ समझाकै। सुन लो ध्यान लगाकै सही विचार सन्तों का।।

4. भक्ति से दे कै शक्ति दें पलट कर्म की रेख। इनकी दया से हल्के होजां होणी के भी लेख। सत्संग में आ देख नया संसार सन्तों का ।।

5. चन्द्रभान सन्त की लीला बिरला जाने कोय। परमारथ के कारण ही ये सतगुरु प्रकट होय। दाग जिगर के देता धो व्यवहार सनतों का ।।  

भजन-216

 ( तर्ज:- बन्दे दो दिन का मेहमान )

 टेक:- ओम हरि कह बारम्बार, बहना होज्या नैया पार।

1. हरि भजन बिन सूनी काया, नाम रटन ने यो तन पाया। पूरे करज्या कौल करार, बहना होज्या...

2. पांचों के मत तलवे चाटै, एक-एक कर तेरी जड़ नै काटै। रहना इनसे है होशियार, बहना होज्या...

3. पांच तत्व से घिरी प्रानी, एक दिन होज्या खत्म कहानी। काल बली आ दे किलकार, बहना होज्या...

4. भूली वस्तु सही लखाते, गोबिन्द से हैं गुरु मिलाते। ......... सुन ले सन्तों का प्रचार, बहना होज्या...

5. चन्द्रभान सन्त बतलावें, | से संकट मिट जावैं। हरि भजन से हो उद्धार , बहना होज्या...

दोहा : बाणी ऐसी बोलिए, मन का आपा खोय। औरन को शीतल करै, आप भी शीतल होय।।  

भजन-217

( तर्ज:- यह मतलब का संसार है )

टैक:- जब लग घट में प्रान हे रट ले ने भगवान हे। कभी तो दीन दयाल के भनक पड़ेगी कान हे।।

1. मेरा तेरी दुखड़ा दे रही ढेरी हो ज्यागी तन की। पांच विषयों को करले काबू गन्दगी दूर हटा मन की। है दो दिन की मेहमान है, सहम हुई गलतान हे।।

2. हरि ओम का साबन लाके दाग जिगर के ले ने थो। करी कमाई आगे आवै बीज अगत के बहना बो। हो ज्यागी धनवान हे, जै पड़ज्या सच्ची बाण हे।।

3. दसों इन्द्री बस में करकै बहना राम सुमरले है। हिम्मत का हो राम हिमाती भवसागर से तिरले हे। करले हरि गुण गान है, सदी जमालें ध्यान हे ॥ 4. चन्द्रभान सन्त कहते हैं हर मैं प्रीतिं चल गा भगतां के वश भगवन हों सै तेर सुनै भाज्या आवै पावे गति महान है, हो ज्यागा कल्याण हे।  

दोहा: - वचन बड़ा अनमोल है, बोल सके तो बोल। हिय तराजू तोलकर, फिर बाहर मुंह खोल ।।

भजन-218

 ( तर्ज:- कोए आवै कोए जावे )

 टेक:- तेरी होज्या मनसा पूरी तूं लाले हर में हेत नै।

1. मोह माया में पागल हो रही फंस दुनिया के झंझट में। ऐल फैल में सैल करै क्यूं कुछ ना फायदा अटपट में। सब तज दे नै मगरूरी, तू लाले हर...

2. मरते गेलां मरै नहीं है जीते जी का मेला यहां। दो दिन मन बहलावन खातिर बन रहा नकली खेल यहां। है सब बात अधूरी, तू लाले हर...

3. राम नाम के दीपक से है पाप अन्धेरा सब टलता। करे काम के दाम रहें ना लेखा साफ वहां मिलता। मिल ज्यागी मजदूरी, तू लाले हर...

 4. सहजो, करमां, मीरांबाई ध्यान हरि का धरगी है। अहिल्या, भिलनी, अनसुइया वा गनका पार उतरगी हे। है आज तलक मशहूरी, तू लाले हर...

5. चन्द्रभान सन्त की बाणी ओम नाम जै गाएगी। सत्संग में कर भजन कीर्तन परम गति मिल जाएगी। यह लिख ले बात जरूरी, तू लाले हर...  

भजन-219

( तर्ज:- हरि का नाम लेने से )

टेकः- उमंगे रंग भरी लाया, यह शुभ दिन आज का प्यारा। हजारों साल जीओ सन्त, लगाओ मिलकै जयकारा।।

1. है पणवासी खुशी ल्याई, खिली चन्दा ज्यूं रोशनाई। सन्त हरि रूप हैं भाई, बतादूं भेद मैं सारा।।

2. हैं ऐसे लेख बतलाते, पाप से प्राणी दुख पाते। हरि जब आप हैं आते, रूप सन्तों का धारा।।

3. शरण इनकी में जो डटते, हैं मन के दोष सब मिटते। ये तन के रोग भी कटते, दवा बिन ढंग है न्यारा॥

4. उमर इनकी हजारी हो, यही विनती हमारी हो। जोत सन्तों की न्यारी हो, गगन में ज्यूं धुव तारा।।

5. कह चन्द्रभान मन खिलज्या, शरण जै रन मिलज्या। तो सूली सूल से टलज्या, हो आनन्द गात में भारा।। उमंगे रंग भरी लाया...  

भजन-220

 ( तर्ज:- सादा के टेक:- सन्त बड़े परमार्थी हों घन ज्यों बरसे आ तप्त बुझावें औरां की यह अपना पारस ला

1. दर्शन कीजे सन्त के दिन में कई-कई बार। मास आसोज का मेंह ज्यूं यह बहुत करै है | साधु वृक्ष सत्‌ नाम फल शीतल शब्द विचार। जग में होते सन्त नहीं तो जल मरता संसार । युक्ति से मुक्ति करते दें तीनों ताप भगा ।।

2. सन्त मिलन को चालिए तज माया अभिमान। ज्यूं-ज्यूं पग धरनी धरै त्यूं-त्यूं यज्ञ समान । सन्त रूप हरि आप हैं पावन परम पुराण । मेटें दुविधा जीव की यह सबका करें कल्याण। पांच ठगों को कर काबू दसों के मेटैं घा।।

3. सन्त मिले साहिब मिले नहीं अन्तर कुछ बतलाते। सन्त मिलन से साहिब तो हैं खुद आकर मिल जाते। कहीं सेवक कहीं नेता बन कहीं दूत गुरु कहलाते । भिन्न-भिन्न रूप बना जीवों को सही मार्ग दिखलाते। रोग दोष ने न्यारे ढंग से करते कती सफा।।

4. चन्द्रभान सन्त के दर्शन बड़भागी ही पावे। जो होवै सूली सजा तो कांटे से टल्ल जावे। संत की लीला अगम कोए बिरला ज्ञानी गावै बहतरनी तै पार होन का सतगुरु राह बतावै इनकी सेवा तन मन से कर अधभुत मेवा खा