भजन-1
( तर्ज:- सादा ) टेक: हें भगवान एक बेटा पर उपकार करनियां दे दे। भोली भाली जनता का उद्धार करनियां दे दे।।
1. मोहनी मूरत प्यारी सूरत हो चन्द्रमा सी श्यान। आज्ञाकारी पर उपकारी हो नीति में गुणवान। रहै भक्ति के मां ध्यान राम तैं प्यार करनियां दे दे।।
2. कै तो दे दे भक्त मनै कै दाता के सूर। ना तो रखदे बांझ कती क्यूं सहम गवाया नूर। रहै पाप तै दूर, धर्म प्रचार करनियां दे दे।।
3. अष्ट बसु ग्यारह रुद्र रक्षा करो सूरज बारा। बावन भैरु छप्पन कलवे करदो मेरा निस्तारा। जो सबने लागै प्यारा इसा ब्यौहार करनियां दे दे।
4. ध्रुव भ्रक्त प्रहलाद जिसा दे होज्या कार उमंग की । ब्रह्मज्ञानी हो खास निशानी बात करै नये ढंग की । चन्द्रभान कह सत्संग की भरमार करनियां दे दे।।
वार्ता :- इसी विचार में मगन हो माता बूली देवी सो जाती है। मामूली ही आँख लगी थी कि भगवान की किसी शक्ति ने इस प्रकार आवाज लगाई ।
भजन-2
टैक: राम समारै काम सफल कमाई हो । दिन थोड़े की बात तेरी मन चाही हो ।।
1. बनज्या काम जरूरी, कोन्या रहैगी बात अधूरी । तेरी होज्या मनसा पूरी कला सवाई हो ।।
2. गुण गोबिन्द के गाले, ब्रह्मा, विष्णु, महेश मना ले। तूं हर तैं सुरती ला ले जो सुखदाई हो ।।
3. हरि ने सब बातां का बेरा, पूरा काम करे ओ हे तेरा। हो दिल का दूर अन्धेरा जब रोशनाई हो ।।
4. चन्द्रभान रटा कर राम, दोनूं वक्त सुबह और शाम । जो ले गिरते न थाम खास दवाई हो।।
वार्ता:- इस आवाज को सुनकर माता बूली देवी बड़ी प्रसन्न हुई और अपना रोजाना का प्रोग्राम इस प्रकार बनाया तथा माता जी की मन की मुराद पूरी हो गई।
भजन-3
तर्ज :- बेटे का वरदान मिला टेक: तन मे लगा उमाहया मन मे खुशी मनान लागी दोनु बख्ता सुबह शाम हरि किर्तन गान लागी
1. रह धर्म में नीत पाप का कोन्या लावा लेश। भिक्षा बिना नहीं जा उल्टा घर पै आ दरवेश। नहीं किसे का ब्रह्म दुखाना जित ताहीं चालै पेश ।
नहा धो के दे सूरज ने पानी निता नित हमेश। करकै याद गणेश शिवजी सींजन जान लागगी ।।
2. आए अतिथि की सेवा करकै कोन्या नाक चढ़ावै। मीठी बाणी प्रेम से रहना सब तै हँस बतलावै ।
होई माता ने याद करै रोजाना शीश झुकावै। मंगलवार के व्रत करै और बजरंग बली मनावै। पणवासी ने सतनारायण की कथा कुहान लागगी ।।
3. ऐल फेल भड़कीला बाणा सुरमा स्याही तज दी। झूठ बोलना घाट तोलना सभी बुराई तज दी।
गुड़, शक्कर और सीरा बिल्कुल कच्ची मिठाई तज दी। बनी तेल की चीजें सारी मिर्च खटाई तज दी। दूध दही घी माखन सूक्ष्म भोजन खान लागगी।।
4. गऊ ब्राह्मण साधु की सेवा नित का नेम बना री। ग्यास मौस ने सीधा मिनसै देबी मात मना री ।
चन्द्रभान गरावड़ का कह वा सोच रही महतारी । आशा तृष्णा मेटन नै कद टेर सुनै गिरधारी । भूखे न अन्न प्यासे न जल धर्म कमान लागगी ।।
वार्ता:- विक्रमी सम्वर्त 1975 की कार्तिक सुदी पूर्णमासी को प्रात: 6 बजे के लगभग नए शिशु के होने की संभावना में माता बूली देवी को कुछ पीड़ा होती है। कष्ट पड़ने पर भगवान का सहारा होता है। लाला नेकी राम जैन भगवान से इस प्रकार प्रार्थना करने लगे।
भजन-4
( तर्ज: चौकलिया ) टेक:- तूही तूही तेरा नाम सही मेरा बेड़ा पार करनिये। निराकार साकार तुम्हीं भक्तों के कष्ट हरनिये ।।
।. सनक सनन्दन और सनातन तुम हो सन्त कुमारा। पाताल से पृथ्वी लावन ने था रूप वराह का धारा। यज्ञ पुरुष हो चतुर्भुजी तुम भेद बतागे सारा । ल्वाए वेद हैग्रीव बन कै मधुकण्ठ दैत्य को मारा। नर नारायण अवतार धार बद्री केदार फिरनिये
2. कपिल मुनि बन देवहुति को सांख्य योग सुनाया दतात्र्य बन राजा अम्ब्रीक को वेदांत पढ़ाया ऋषभदेव बन जैन देव से सैरागी धरम फलाया पर्थु मतस्य तुम कच्छ्प हो पहाड़ पीठ पर थाया अमृत कलसा हाथ मे ले धन्वन्तरि रूप धरनिये
3. मोहनी रूप बना देवतो की लाज बचाने वाले नर्सिंह बनके हिरणाकुश का खोज मिटाने वाले बामन बन कै बली के दर पै अलख जगाने वाले । हंस अवतार नारद ध्रुव को मोक्ष दिलाने वाले । हरिनाम ले गज की खातिर खुद हो कष्ट भरनिये ।।
4. परशुराम तू ही रामचन्द्र और वेद व्यास तुम्हीं हो। कृष्ण बन कंस काल यवन जरासन्ध का नाश तुम्हीं हो । बौद्ध अवतार कल्कि और कलियुग की आस तुम्हीं हो । चन्द्रभान के ध्यान में छः रुत बारह मास तुम्हीं हो । तेरी मेहर की नजर फिरै तो कोन्या भक्त डरनिये।। वार्ता: - दिन के सवा आठ बजने वाले हैं । जिस नवजात शिशु की प्रतीक्षा सारा जैन परिवार बड़ी बेसब्री से कर रहा था, शुभ मुहूर्त और नक्षत्र में भगवान ने वह फूल खिलाया । लाला जी को क्या पता था कि इस फूल की सुगन्धि बहुत दूर तक फैल जाएगी ।
भजन-5
( तर्ज: जयमल फत्ता ) टेक : विक्रमी सम्बत् साल पछतर कातिक मास बताया । शुक्ल पक्ष की पणवासी ने फ़िरगी हर की माया ।।
1. निकला सूरज हुआ सवेरा पक्षी करें चहचाहट। बेड़ा पार करो माँ दुर्ग तेरे करादां पाठ। मुंह बाये सारा कुनबा देखै नए शिशु की बाट। यह शुभ मुहुर्त आन सधा जब बजगे सबा आठ। बन्द कली ने मुंह खोला एक नया फूल मुस्काया ।।
2. नवरतन नै दे कई जनम खुश होगी जननी माई । धरती लागे चुचकारन सब कै आनंदी छाई। लाला नेकीराम नै चाह मैं बाँटी खुब मिठाई।। बहन सरुपी नै मिला खिलौना चन्दा जैसा भाई। चंदुलाल की दुजी बान्ह का हर नै मेल मिलाया।।
3. खबर लागते अगड पड़ौसी देन बढ़े आयें । धुधा पुत फल्लो लाला जी होगे मन के चाहे।। पूर्बले जन्म का फल मिल ग्या थारे खिल्ग्ये भाग सवाये। अगड पड़ौसन कठी हो के गीत खुशी के गाये कोए उछलै कोए कूदे नाचै सबके लगा उमाहया ।।
4. मात पिता हों जन्म देने के नहीं कर्म के ज्ञाता। कर्मा के अनुसार छटी ने भाग लिखे बेमाता। रेख-देख के लेख लिखै नहीं भेद किसे न पाता। करनी जैसी भरनी हो फल बैसा ही मिल जाता। चन्द्रभान इस लिखतम का अन्त किसे ने पाया ।।
भजन-6
छटी का गीत तर्ज : समझ बिन मनुश्य तेरी गलती टेक: आज रतन मिल्ल कठी सारी गीत गोविंद की गाओ हे
1. जगदीश इश के गा ल्यो छंद हे कट ज्या जन्म जन्म के फंद हे दिल मे आनंद हो भारी भगवान का शुक्र मनाओ हे
2. जिस पै फिरती नजर मेहर की, कोन्या रहती चीज कसर की । हर की माया हो न्यारी जै सच्ची सुरत लगाओ हे।
3. घन्ने जाट की लाज बचा दी, कबीर भक्त की यज्ञ रचा दी। निभा दी सुदामा की यारी ऐसा प्रेम बढ़ाओ है।
4. चन्द्रभान फल मिलै जरूरी, कोन्या रहैगी बात अधूरी । मनसा पूरी हो सारी मन चाहा फल पाओ हे।।
वार्ता: दसवें दिन हवन करा के नवजात शिशु का नामकरण संस्कार किया जाता है। पंडित जी ने ज्योतिष के हिसाब से भविष्यबाणी की, जो बिल्कुल सिद्ध हुईं ।
भजन-7
( तर्ज:- ले चल साजन नदिया के पार ) टेक: दसवें दिन हवन करन ने हो रहे पंडित तैयार । घुप, दीप, घी, सामग्री की उठ रही महकार।।
1. हल्दी, चावल, खाण्ड समिधा गंगा जल मंगवाया। बेदी रचदी पंडित जी ने श्री गणेश मनाया । नव ग्रह का पूजन कराया, सच्ची सुरती धार।।
2. गायत्री और हवन के मंत्र तै आनन्द सा छाग्या। जच्चा-बच्चा और पिता कै बांध हाथ कै तागा। फिर पतरा देखन लाग्या, करन नै नामकरण संस्कार ।।
3. मीन राशि हैं वर्ग शेर का शुभ नक्षत्र मान । च पर नाम धरा जा तो रहैगा ठीक मिजान। नाम धरो तुम चन्द्रभान, इस ज्योतिष के अनुसार ।।
4. चन्द्रभान कह रेख बताती ये हो पूरा बलकारी । ब्रह्म ज्ञानी हो तेजस्वी या होगा छत्रधारी । कुनबे तै न्यारा रहै ब्रहमचारी, कहता मेरा विचार ।। बार्ता:- यह भविष्य बाणी सुन कर लाला नेकी राम जैन प्रसन्न हो कर पंडित जी से इस प्रकार कहने लगे ।
भजन-8
( तर्ज:- दौड़ लंगड़ी) टेक:- न्यू की न्यू बनगी तो दादा तेरे मुंह में लाडू फोड़ूं। जीभां तलबे चाटु पां लागूं दोनूं हाथ जोडूं हो जोड़ूं।।
1. प्यारी मीठी लागै बाणी बात कही जो आछी हो। ज्योतिष का हिसाब लगा तनै कुछ ना छोड़ी बाकी हो । राम करै तेरे मुंह की बात सोलह आने साची हो। कुख सफल इस की माता की मैं भी मूंछ मरोड़ूं।।
2. बांटु खील दीवाली नै जै मन की चाही हो ज्यागी बींधे हुइ मेरे मरहम की खास दवाई हो ज्यागी आम के आम गुठली के दाम याह सफल कमाई हो ज्यागी धर्म के बिरवे सींच सींच के मन चाहे फल तोडु
3. जींदगी मैं योह न्जारा दीख ज्या जै एक बार। सीस आत्मा दे मेरी तुम सो खाई तैं बाहर-बाहर।। तेरी आज्ञा सिर माथे पै हर दम रहूं ताबेदार । नवहा धबा तेरी कड़ मसलदूं धोती तलक निचोडूं। ।
4. चन्द्रभान गराबड़ के मैं गुण हरि के गाऊंगा। भजके राधेश्याम नाम जीवन सफल बनाऊंगा। तन-मन-धन अर्पण करकै अपना प्रण पुगाऊंगा। गऊ ब्राह्मण साधु की सेवा तैं बिल्कुल ना मुंह मोड़ूं ।।
वार्ता:- बच्चे की आयु पांच वर्ष हो जाती है। परन्तु विधाता के लेख को कौन टाल सकता है। विक्रमी सम्बत् 1980 चैत की दसवीं के दिन लाला नेकी राम जैन का स्वंगवास हो जाता है। पांच वर्ष की किशोर आयु में बच्चा पिता के प्यार से वंचित हो जाता है।
भजन-9
( तर्ज:- बहरे तबील ) टेक:- हर आगै नर के करै कुछ पेश है चलती नहीं । लाख जतन करलो कर्म की रेख पर टलती नहीं ।।
1. एक टम खत्म सब लाड हों, मिट्टी में मिलने हाड हों । दुबली नै दो साढ़ हों दारू दवा मिलती नहीं ।।
2. बनकै बिगड़ज्या खेल सब, नहीं चलती धक्का पेल तब। दीपक का निमड़े तेल जब फिर जोत है जलती नहीं ।।
3. चैत की दसवीं आ गई, लाला को मृत्यु खा गईं। घर में उदासी छा गई पर दाल कुछ गलती नहीं ।।
4. चंद्र्भान लाचार है, यह चक्र मे संसार है। ईश्वर ही सर्वाधार है एक पत्ती तक हिलती नही।।
वार्ता: लालाजी का स्वर्गवास होने पर सारा परिवार शोक मगन हो गया परंतु माता देवी ने हिम्मत से काम लिया क्योंकि छोटें छोटें बच्चो का पालन् पोषण का भार उसी पर आ पड़़ा था अत: छोटे बच्चों को इस प्रकार समझा समझा कर धांधस बंधाने लगी
भजन-10
( तर्ज:- चौकलिया ) टेक:- काचा कुनबा देख कै माँ ने घूंट सबर की भरली।
आपा मार के बैठ गई थी करड़ी छाती करली ।॥।
1. नहीं काल कै टाल कहैं हो यम के दूत छलावा। जीते जी का मेल जगत में मरे पै किसका दावा ।
हाथों में ते चीज लिकड़ज्या पाछे के पछतावा । दो दिन का रोन: ग्रोना सब हो सै लहू जलावा। सिर का बोझ पड़े पायां पै मन में पक्की जरली ।।
2. सब बालकों ने कट्ठे करकै न्यू समझावण ल्ागी। पैदा सो ना पैद सभी या बात बतावण लागी।
सदा नाम साई का हो से कथा सुनावण लागी। छोटे बालक मोती लाल के लाड लडाबवण लागी। भलो भला कै राजी करदिये सारी मेट कसर ली।।
3. साठ हजार सगर के बेटे वह भी काल ने अर | हिरनाकुश, कंस, रावण नहीं काल से बचने पाए। कृष्ण जैसे योगी राज भी स्वर्ग लोक को धाए। एक सौ एक कौरू खपगे सब मौत के मुंह में आए। किस किस के नां गिनवाऊं या कितनी दुनिया मरली ।।
4. च़द्धभान गरावड़ का कह टूटी के ना बूटी । काम कर्म का मेल खत्म हो खाली होगी मुट्ठी । पतंग टूट कै उड़ज्या के हो डोर हिलाएं झूठी । लाचारी पर्वत तैं भारी ले सबर की घंटी । हिम्मत का हो राम हिमाती नीत हरि में धरली ।।
वार्ता:- माता बूली देवी ने बच्चों को बहला फुसला कर खाना खिला कर सुला दिया। परन्तु चिन्ता में उसको नींद नहीं आईं दुख में इन्सान भगवान का सहारा लेता है। माता बूली देवी भगवान को इस प्रकार याद करने लगी ।
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