भजन-101
( तर्ज:- जो सन्तों से बैर लगागे )
टेकः- हां रै ला ध्यान हरि में भाई, एक दिन जाना होगा रै।
1. काल अचानक दे दे घेरी, कुछ भी पेश चले ना तेरी। काया की फूक होज्या ढेरी, नहीं ठिकाना होगा रै।।
2. करता है जो पाप कमाई, रह ज्यागी सब धरी धराई । साथ चलै ना धेला पाई, माल बिगाना होगा रै।।
3. ख्याल छोड़ दे कच्चा मन्दा, जाण बूझ क्यूं हो रहा अन्धा। करता है क्यूं खोटा धन्धा, फिर पछताना होगा रै।।
4. नहीं मिलता सुख करतार बिना, भाई हरि नाम आधार बिना । सतगुरु ज्ञान विचार बिना, तनै दुखड़ा ठाना होगा रै।।
5. चंद्र्भान रट कृष्ण कन्हैया, वही सभी का कष्ट हरैया। जब नाव खबैया, क्या घबराना होगा रै।।
दोहा: सुमरन मारग सहज का, सदगुरु दिया बताय शंवाश शंवाश जो सुमरता, इक दिन मिलसि जाय
भजन 102
( तर्ज:- सेवक के प्राण पुकार रहे)
टेक:- ये सच्चा आनन्द मिलता है, आ देख सन्त के सत्संग में। यहां रोग दोष सब टलता है, आ देख सन्त के सत्संग में।।
।. बहती है गुणधार यहां, है राम नाम प्रचार यहां। एक फूल प्रेम का खिलता है, आ देख सन्त के सत्संग में ॥
2. हैराम नाम की रटन लगी, ये तृष्णा सारी दूर भगी। जब तीर ज्ञान का चलता है, आ देख सन्त के सत्संग में ॥
3. यहां देव दर्श को आते हैं, सत्संग की महिमा गाते हैं। सब रूप पाप का गलता है, आ देख सन्त के सत्संग में ।।
4. यह चन्द्रभान बताते हैं, भगवन से सन्त मिलाते हैं। एक दीप मोक्ष का जलता है, आ देख सन्त के सत्संग में ।।
भजन-103
( तर्ज:- साथन आओ सत्संग में )
टेक : बहना धरलो हे तुम राम नाम का ध्यान।
1. राम नाम से मुक्ति मिलज्या, लाख चौरासी फंदा ढलज्या। हो ज्यागा कल्याण, बहना धरलो है...
2. एक दिन होगा हर कै जाना, कर्मा का फल होगा पाना। करलो कुछ सामान, बहना धरलो हे
3. बिना भजन ना पार तिरैगी, अधम बिचाले डूब मरैगी । होवै हे सहम बिरान, बहना धरलो हे.......
4. करले ने कुछ नेक कमाई सन्तों ने जो विधि बताईं। रटले ने भगवान, बहना धरलो है.
5. कह चन्द्रभान तज हेरा फेरी, बनज्या गुरु चरण की चेरी। हो मंजिल आसान, बहना धरलो है....
दोहा:- सन्त की लीला अगम, बिरला जाने कोय। परमारथ के कारण ही, सतगुरु प्रकट होय।।
भजन-104
( तर्ज:- गाड़ी आले मनै बिठाले )
टेकः- मोर मुकुट बंशी वाले तुम, आओ नन्द किशोर, देखां बाट तेरी।
1. यशोदा जी के लाल तुम्हें कहते कृष्ण कन्हैया हो। मुरली मनोहर श्याम तुम्हीं बलभद्र के भैया हो। वृन्दा वन में धेनु चरैया लेगे चित न चोर ।। देखां बाट तेरी।
2. दिन और पुकारें थी ले नाम व्रज के वासी का रुकमण के रखवाले बन तनै फंदा काटा फांसी का कुब्जा कुबदी दासी का तनै पलत दिया ढँग और देखां बाट तेरी।
3. मीरांबाई की विपता के काट दिये तनै जाले हो। द्रोपदी की लाज बचाई करकै ढंग निराले हो। तुम नाग नथाने वाले हो दी घाल नाक में डोर, देखां बाट तेरी ।
4. चन्द्रभान सन्तों का कहना, नाम हरि का रटना है। दिन और रात यही चक्कर सही नेम धर्म पे डटना है। तेरे नाम पै मिटना है करो मेरी बात का गौर, देखां बाट तेरी । मोर मुकुट बंशी वाले...
दोहा:- सार एक हरि नाम है, जगत विषय बिन सार। जैसे मोती ओस का, मिटत न लागे वार॥
भजन-105
( तर्ज:- सावन का महीना )
टेक:- कल करना सो आज करे ना पल का बेरा सै। बन्दे रटले नाम हरि का जो साथी तेरा सै।।
1. विषय वासना में तूं मत ना फंस कै जिंदगी खो। दो दिन का मेहमान मुसाफिर लाले हर। चार दिनां की चाँदनी हो फेर अन्धेरा सै ।।
2. पांचों के चक्कर में फंस कै हर का नाम भुलाया। अन्त समय पछताना हो सै सहम में धोखा खाया। होज्या माल पराया जिसने समझे मेरा सै।।
3. सीता राम चाहे राधेश्याम कह क्यूं ना हरि गुण गावै। थोड़ी सी हिम्मत कर बन्दे सुखी अन्त में पावै। के साथ निभावे जिसने दिल तै टेरा सै।।
4. चन्द्रभान चलो सन्त शरण में हो ज्यागा निस्तारा। फंदा कटज्या संकट मिटज्या मिलज्या स्वर्ग किनारा। टूटै जाल भरम का सारा जिसने घेरा सै।।
भजन-106
( तर्ज:- नागिन )
टेक:- रट नाम हरि, ले सुध तेरी, वो सच्चा दीनानाथ, सुन ले तेरे काम की बात ।
1. हरि भक्त के वश में हों वेदों ने बात बताई है। छोड़ सिंहासन भाजे आवँ जिसने टेर लगाई है। गज और गिरह लड़े जल भीतर गज की करी सहाए है। ध्रुव भक्त को मोक्ष दिला सब करदी मन की चाही हैं। बन गडवाला, संकट टाला, भरा नरसी के भात। वा सब देखै थी पंचायत।
2. कबीर भक्त की यज्ञ रचाई खुद बनगे थे भंडारी। धन्ने जाट की इज्जत राखी जाने सै दुनिया सारी।. सैन भक्त की संशया मेटी नाई बनगे गिरधारी। खम्ब चीर प्रह्लाद उबारा नर्सिंघ शान दुखा पयारी जब सुनी टेर ना करी देर आ सिर पै धर दिया हाथ हरी नै हाज़िर कर दिया गात।
3. मीरांबाई पार उतरगी नाम रटा मोहन प्यारा। द्रोपदी का चीर बढ़ा के मेट दिया झंझट सारा। अनसुइया की लाज बचाई खेल दिखाया था न्यारा। सुआ पढ़ाती गनका का हुआ हरि नाम से निस्तारा। वा अहिल्या तारी, हुई भिलनी प्यारी, जो नां ले थी दिन रात, एक दिन होगी सफल खुबात।
4. जग ने बेरा रैदास के घर में गंग बहाई का । बाल्मीक ने चटका मिला ऋषियों की बात बताई का। जै पार निधि तै हो तिरना कर सेवन एक दवाई का। चन्द्रभान सन्तां के संग हो दर्शन कृष्ण कन्हाई का। तेरे कटैं जाल, रट दीन दयाल, है वही पिता और मात, ये पांचों लगा सकै न घात।
भजन-107
( तर्ज:- सादा )
टैक:- बिना भजन बेकार या काया कोन्या काम की। हो ज्यागा कुछ मोल तू रटना लादे राम की ।।
1. करोड़ों बंध छूट के मनुष्य की योनी है थ्याईँ । पिछली बात भूल कै सारी क्यूं गलती खाई। सन के चक्कर में फंस के तबियत ललचाई। मोह माया में धंस के किसने परम गति पाई) छोड़ पांच का साथ ले माला हर के नाम की ॥।
2. राम नाम आधार बिना हो बिन आई मरना है. जन्म मरण के चक्कर में होगा दुखड़ा भरना। बहतरणी की धारा में जै चाहवै सै तिरना। श्रद्धा और विश्वास राखले सतगुरु का शरना। मिलज्या मुक्ति कर पूजा सन्तां के धाम की ।।
3. कल करना सो आज करै ने पल का ना बेरा। हो ज्यागी लाचारी काल जब घाल दे घेरा। गूंगी बनगी जीभ तेरी ना राम नाम टेरा। मौत निमानी नष्ट करै यो सुन्दर तन तेरा। पाई तक ना उठैगी तेरे हड्डी चाम की ।।
4. हरे राम की पूंजी बिल्कुल साथ चलै तेरी । चन्द्रभान लख चौरासी की छुट ज्यागी फेरी। काम क्रोध मद लोभ मोह तज सब मेरा मेरी । चल सन्तां के धाम करै ना पल की भी देरी। सत्संग के मां बैठ लगा सुरती घनश्याम की ।। हो ज्यागा कुछ मोल तू, रटना....
दोहा: - राम नाम निज मूल है, चार वेद का सार। कर जो सुमरिन करै राम का, सहज होत भव पार।।
भजन-108
( तर्ज:- करलो सोच विचार ) टेक : यह जीवन है अनमोल वॄथा खोवै ना ।
1. भजन करन ने यो तन थ्याया, मध में फंस के राम भुलाया। हो कै कती निरोल, वृथा खोबै ना।
2. जैसी करनी वैसी भरनी, सुबह शाम ले राम समरनी | हरि नाम मुख लोल, वृथा खोबे ना।
3. भजन बिना हो दुखड़ा भरना, पाप-पुण्य का होज्या निरना। है वहां सच्चा तोल, वृथा खोबै ना।
4. कुल्हड़ी में गुड़ कोन्या फूटै, झूठ कहे ना पैंडा छूटै। सब खुल ज्यागी पोल, वृथा खोवै ना।
5. चन्द्रभान सन्त का नारा, राम नाम से हो निस्तारा। ले घट के परदे खोल, वृथा खोबै ना।। यह जीवन है अनमोल...
दोहा:- सन्त मिले साहिब मिले, अन्तर रही ना रेख। मनसा वाचा कर्मणा, सन्त और साहिब एक ।।
भजन-109
( तर्ज:- साथन आओ है)
टैक:- बहना मेरी हे क्यूं अन समझें हो काल।
1. तने बात बता दूं सारी है, तेरी होज्या दूर बीमारी है। तूँ सत्संग के मां चाल, बहना मेरी है।।
2. रोग दोश तेरे सारे मितज्या, दुख विपता के फंदे कतजया हो ज्या कती नीहाल बहना मेरी हे॥
3. श्रद्धा से हो मनसा पूरी, मन चाहा फल मिलै जरूरी। ले पर्चा फिलहाल, बहना मेरी है।।
4. सत्संग में सनतों की माया, दुख दर्दा का होवै सफाया। कारें सब जंजाल, बहना मेरी है।
5. चन्द्रभान कह ले ले लटका, विघ्न क्लेश मिटै सब खटका। जब हों सन्त दयाल, बहना मेरी हे।।
दोहा : राम भरोसे जो रहै, परवत पर लहराये तुलसी बिरवा बाग का, पानी दे कुम्हलाए।।
भजन-110
( तर्ज:- चालो देन बधाई )
टेक : रट ले गोबिंद हरी, हाँ ए जै पार उतरना चाव्है
1. भगत बचैया धेनु चरैया, दुख भंजन हो कष्ट हरैया। होज्या नैया पार तेरी, हां ए बन मल्लाह आप लघानें।।
2. राम नाम सरजीवन बूटी, हरि ओम की पीज्या घूंटी। झूठी कोन्या बात मेरी, हां ए ओ साथी साथ निभावे।।
3. हरि भजन गुण खान बताई, मुक्ति पद की मिलज्या रही! वा मीरांबाई नहीं डरी, हां ए हरिनाम सुमर सुख पावै।।
4. चन्द्रभान यह राम कहानी, हमने है सनतों से जानी। बाणी सुन ले खास खरी, हां ए गोविंद से गुरु मिलावै । रट ले ने गोबिन्द हरि...
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