भजन-111

( तर्ज:- दाग जिगर के धोवे )

 टेक: सत्संग बड़ा हे बताया सुन बहना मेरी।

।. सत्संग में मिले परमगति हे, इसमें कोन्या झूठ रती है। हो जाती शुद्ध काया, सुन बहना मेरी ।

2. सत्संग में सनतों के दर्शन, करके न मन होज्या प्रसन्र। दुख का होवै सफाया, सुन बहना मेरी।

 3. सत्संग की हो महिमा न्यारी, आते हैं वहां खुद गिरधारी। यह सन्तों ने समझाया, सुन बहना मेरी ।

4. कर पांचों को वश में बहना, हरि ओम के रस में बहना। सच्चा आनन्द छाया, सुन बहना मेरी ।

5. कह चन्द्रभान बंध ठाड़ै खूटै, आवागमन तै पैंडा छूटै। है सनतों की माया, सुन बहना मेरी । सत्संग बड़ा हे बताया...  

भजन-112

( तर्ज:- हो ज्यागा निस्तारा तू रटना )

 टैक:- तेरी आनन्द होज्या काया, जा बैठ हरि के ध्यान में।

1. काम क्रोध मद लोभ मोह का, त्यागन दा कक | पांचों इन्द्री वश में करकै, विषयों से दर नम ।। तो फल मिलज्या मन चाहा, जा बैठ हरि के ध्यान मै।

2. मेरी मेरी दुखड़ा दे रही, तज दे हेरा फेरी नै। एक दिन माल पराया हो के, फूके धन की ढेरी नै। ना साथ चलैगी माया, जा बैठ....

3. करनी जैसी भरनी हो, फल तेरे कर्म के थ्यावैंगे। बोकै पेड़ बबूल बतादे, आम कड़े ते आवैंगे। यह सनतों ने समझाया, जा बैठ...

4. ब्रह्म रूप भगवान मिलै, जै हरे राम ने रटले तूं। बिगड़े काम समर जांगे, जै नेम धर्म पै डटले तूं। तेरे दुख का होवै सफाया, जा बैठ...

5. चन्द्रभान कह सन्त दया से, सब फंदा दुख का टलता। सतगुरु की जा पहुँच शरण में, कौन कहै हर ना मिलता। है टोहया जिसने पाया, जा बैठ हरि के ध्यान में।

भजन-113

( तर्ज:- आज रल मिल कडट्टी सारी )

टेक:- बहना करकै शुद्ध विचार, हरि कीर्तन गाओ हे।

1. राम वही हे श्याम वही हे, कर देता सिद्ध काम वही है। नाम वहीं जीवन आधार, सच्ची रटना लाओ हे।

2. रटना हो जै सच्चे दिल की, उसकी विपता होज्या ह ल्को।. पा पल की कोन्या लागै वार, हरि दर्श ने पाओ है।

3. राम नाम की हो मतवाली, पीज्या हरि ओम की प्याली। काली मिट हों दूर विकार, सत्संग के मां जाओ हैं।

4. चन्द्रभान कह पलट रवैया, सन्त बनैं जब आप खिबैया। नैया होज्या परले पार, मत दिल में घबराओ है। बहना करकै शुद्ध विचार...

दोहा:- सन्त रूप हरि आप हैं, पावन परम पुराण। मेटैं दुविधा जीव की, सबका करें कल्याण ।॥।

भजन-114

( तर्ज:- हां ए कर ख्याल अगत का )

टेक:- हां ए बिन समझे धोखा खावै, तेरा सतगुरु भरम मिटावै।

।. भूल में सारी जिंदगी खो दी, इब तो कर आगे की सोधी। हां ए ना तो फेर पीछे पछतावै, तेरा सतगुरु...

2. गुरु दया से मुक्ति मिलज्या, रोग दोष हट संकट टलज्या। हां ए यो जन्म सफल हो जावे, तेरा सतगुरु...

3. गुरु मेहर से भगवन दर्शन, हो ज्यागी तेरी आत्मा प्रसन्न । हां ए जै सच्चा ध्यान लगावै, तेरा सतगुरु...

4. काल बली जब दे दे घेरा, अन्त समय गुरु साथी तेरा। हां ए गुरु धुर तक साथ निभावै, तेरा सतगुरु...

5. कह चन्द्रभान बन गुरु की प्यारी, बहना कटजां सभी बीमारी । हां ए फिर मोक्ष गति को पावै, तेरा सतगुरु...

दोहा:- साध संग संसार में, दुर्लभ मनुष्य शरीर । सन्त संगति सू मिटत है, त्रिविध ताप की पीर।।

भजन-115

( तर्ज:- सत्संग के मां जाने तै तेरे हों शुद्ध )

टेक:- हरि ओम के रटने तैं, तेरी कटज्या सब बीमारी है। फंद छुट के आनन्दी हो तूं, भज गोबिन्द गिरधारी है।।

1. जिसने हर की महिमा गाई, भगवन ने आ करी सहाई। वा पार उतरगी मीरांबाई, जानै दुनिया सारी हे।।

2. नाम हरि का गाया करती, वा सच्चा ध्यान जमाया करती। सूआ रोज पढ़ाया करती, वा गनका पार उतारी हे।।

3. सन्तों का ले के नै शरणा, नहीं किसी संकट से डरना। राम नाम का सुमरन करना, होज्या आनन्द भारी हे।।

4. कह चन्द्रभान धुन गाने का, यह वक्त फेर ना थ्याने का। हो चस्का मुक्ति पाने का, तो बन सतगुरु की प्यारी हे।। हरि ओम के रटने तै...

दोहा: - साध संग जग में बड़ो, जो कर जाने कोय। आधी छिन सत्संग की, कलमख डारै खोय।।

भजन-116

(तर्ज:- करलो सोच विचार )

टेक:- हरि नामले टेर कटजां पाप तेरे

1. राम रटे सुख धाम मिलैगा, मन में ज्ञान का दीप जलैगा। पमिटजां सभी अन्धेर, कटजां पाप तेरे।

2. राम नाम भिलनी ने गाए, घर पर आ सब कष्ट मिटाए। खाकै झूठे बेर, कटजां...

3. नरसी जी ने ध्यान धरा था, सरसागढ़ आ भात भरा था। धन की करी बखेर, कटजां...

4. द्रोपदी के बन रखवाले, भीड़ पड़ी आ संकट टाले। दिये ला साड़ी के ढेर, कटजां...

5. गज की जान फंद में आई, नाम लिया जब करी सहाई। जरा करी ना देर, कटरां...

6. चन्द्रभान चल सन्त द्वार, जीवन नैया लगे किनारे। मिटै आवागमन का फेर, कटजां... हरि का नाम ले टेर...

दोहा: - सन्तां की निन्‍दा करै, पर नारी में हेत। वे नर ऐसे जाएंगे, ज्यों रण रेही का खेत।  

भजन-117

( तर्ज:- सादा )

टेक- सुन्दर तन का के बनता जब भीतरले में काला। सतगुरु ज्ञान विचार बिना ना खुलै भरम का ताला...

1. मूर्ख नर अज्ञानी बन क्यूं भूल में धोखा खाया | सन्तां की जा पहुँच शरण में देख हरि की माया। होज्या मन का चाहया पड़ज्या राम रटन का ढाला।।

2. काम क्रोध मद्य लोभ मोह ये पांचों ठग लुटेरे। मौका लगते सही फंसा दें ये जाल कसूता ले रे। ये कोन्या साथी तेरे, कर दें दिन धौली में चाला।।

3. बिना गुरु बेकार है बन्दे सुन्दर काया तेरी । काल बलि की अग्नि में हो एक दिन जल बुझ ढेरी। लाख चौरासी मिटज्या फेरी, ले हरि ओम की माला।।

4. चन्द्रभान कह सन्त दया से मुक्ति पद को पावै। जै सतगुरु की मेहर फिरै तो खुद भगवन मिल जावै। मत दिल में घबराबै, गुरु दे जिता आखरी पाला ।।

दोहा: - घट में है सूझे नहीं, लानत ऐसी जिन्द। तुलसी या संसार को, भयो मोतिया बिन्द।।

भजन-118

( तर्ज: - रटु तेरी माला गिरधारी )

टेक:- बन्दे रटले हरि का नाम, तेरे हो जांगे सिद्ध काम।

1. हिरनाकुश के प्रहलाद ने हर का रट्टा लाया था। गुस्से होग्या बाप वो ताते खम्ब के लिपटाया था। कीड़ी चलती देख भक्त वो बिल्कुल ना घबराया था। जब सीला होग्या थाम, तेरे हो जांगे.

2. ध्रुव भक्त भी बालेपन में गुरु वचन पै चलग्या था। हरि की माला ऐसी फेरी तख्त विष्णु का हिलग्या था। एक दिन हो लाचार हरि खुद आ कुटिया में मिलग्या था। न्यूं कहता जगत तमाम, तेरे हो जांगे...

3. शबरी राम रटा करती थी होगे थे मन के चाहे। ऋषियों के सब छोड़ आश्रम भिलनी घर भगवन आए। आनन्द होकै बड़े प्रेम से झूठे बेर सभी खाए। वहां बनग्या हरि का धाम, तेरे हो जांगे...

4. चन्द्रभान कह राम रटे तैं मिट ज्यागा संकट सारा। सतगुरु की जा पहुँच शरण में होज्या बिल्कुल निस्तारा। ये सोलह आने साची सै भगवान भक्त का हो प्यारा। ये सन्तों का पैगाम, तेरे हो जांगे...

भजन-119

( तर्ज:- सादा )

टैक:- यह संसार मुसाफिर खाना चिड़िया गैन बसेरा। बनी-बनी के सब साथी ना बिगड़ी में कोए तेरा।।

1. के ले के नै आया बन्दे के ले कै नै जाना। धरी धराई माया रहज्या हो सब माल लिराना। बिना बिचारे काम करे तैं होगा दुखड़ा ठाना ! वक्त चूकज्या बात बीत हो अन्त समय पहल समझाए तैं माना ना रहा दीवे तलै अन्धेरा।।

2. मात पिता बन्धु सुत दारा मिलग्या कुटुम्ब कबीला। विषयों के चक्कर में फंस कै होग्या सहम रंगीला। दो दिन का मेहमान मुसाफिर हांडे छैल छबीला। काल बली की तेग चलै तेरा होज्या नक्शा ढीला। यम के दूत पकड़ ले जांगे दे चौगिरदे घेरा ।।

3. खल खांड का एक भा समझा ऊंच नीच ना जानी। अक्ल के अन्धे गाँठ के पूरे हो सहम में खींचा तानी। राम भजन बिन कोरा रहै के होगी विपता ठानी। हो ज्यागा कल्याण तेरा आ सुन सन्तों की बाणी। सत्संग की एक आध घड़ी तैं मिटे चौरासी फेरा।।

4. सुबह शाम दस पांच मिनट जै ध्यान हरि का लावै। राम नाम तै शुद्ध हो काया मुक्ति पद मिल जावै। कर चेती कुछ ख्याल अगत का मत दिल में घबरावै। चन्द्रभान कह भगवन धोरे सतगुरु आप मिलावे। हरि मिलन के सीधे राह का हो सन्तां ने बेरा॥।

दोहा: - सन्त बड़े परमार्थी, घन जो बरसे आय। तपन बुझावें और की, अपना पारस लाय॥ 

भजन-120

 ( तर्ज:- सादा )

 टेक:- सन्त समागम हरि कथा से कटजां विपता सारी। चलो सन्त के दर्शन कर लो हो ज्या दूर बीमारी

1. गाम गिरावड़ चन्द्रभान एक रहता सन्त “न ड पांच वर्ष की उमर तैं पड़ग्या राम रटन का ढाला। दसों इन्द्री वश में कर ली राम नाम की माला। चमत्कारी और परोपकारी सैं अन्न सेवन का टाला। ब्रह्मा, विष्णु, महेश देव खुद दर्शन दें गिरधारी ।।

2. चैब्बीस घण्टे हनुमान की ज्योति की रोशनाई । भगवत गीता रामायण जहां राम धुनी जा गाई। तेतीस करोड़ देवता सारे करते सन्त सहाई। सादा बाणा तेज सन्त का है न्यारी शक्ति पाई। गुदड़ी के मां लाल छिपा एक सादा सा ब्रह्मचारी ।।

3. भगवान भक्त के वश में हों सैं देख लियो अजमाके । यहां ज्ञान गंग की धार बहै हो गात पवित्र नहा कै । अड़सठ तीर्थ का फल मिलता दर्श सन्त के पाके। विन क्लेश मिटेंगे सारे सत्संग के मां आकै। शनिवार और पणवासी ने यहां सत्संग होता भारी ।।

4. करकै ने शुद्ध ख्याल चाल जै दर्श सन्त का करना। त्यागी तपस्वी ज्ञानी ध्यानी करें पाप पुण्य का निरना। चन्द्रभान सन्त हों रक्षक फिर किस तैं क्यूं डरना। का सन्त सहारे लगे किनारे यो खेवा पार उतरना। सारे रोग खत्म होजां सै श्यान देख कै प्यारी ।