भजन-231
टेक:- शुभ दिन आज बताया चलो सन्तों के दरबार है।
1. पणवासी प्यारी आई, तुम चालो देन बधाई । करें भगवन कला सवाई सब बोलो जय जयकार है। शुभ दिन आज...
2. नीत में लावैं, मुक्ति मार्ग बतलावैं। दीनों के कष्ट मिटावैं हैं कलियुग के अवतार है। शुभ दिन आज...
3. हे गीत खुशी के गाओ, सब घी के दीप जलाओ। सन्तों के दर्शन पाओ तो हो ज्यागा उद्धार है। शुभ दिन आज...
4. हो लम्बी आयु इनकी, करें आशा पूरी मन की । जै मेहर फिरै भगवन की तो होज्या बेड़ा पार है। शुभ दिन आज...
5. चन्द्रभान सम्त की माया, ये देख कै मन हर्षाया। किसा सत्संग रास रचाथा जानूं आ रहे कृष्ण मुरार है। शुभ दिन आज...
भजन-232
टेक:- कृष्ण सच्चा साथी सै मेरा इसमें कोन्या झूठ कती। मांगन तै मेरा मान घटै सै मांगू कोन्या एक रती।।
1. ब्राह्मण का सन्तोष बड़ा है असन्तोष से गिरता है। उसको ब्राह्मण नहीं कहते जो रोज मांगता फिरता है। कंगाली में गात थामले जो ध्यान हरि में धरता है। उन बन्दों की भगवान एक दिन जरूर सहायता करता है। उस घर में हारी ना आव जित पतित्रता हो नार सती॥
2. मांगन मरण समान कहैं सैं कोई मत मांगो भीख। मांगन से मर जाना अच्छा या सतगुरु की सीख। क्यू कर गाड़ी खीं चैगा जो छोड़े अपनी लीख। फेर कह मतलब में आग्या रही अगाऊ दी थी। तू भेज रही मैं नाट रहा तेरी इब भी कोन्या॥
3. राजा दक्ष ने यज्ञ करी थी नहीं खुलाये थे शिवजी पार्वती जाना चाहवै थी नाँट रहे थे शंकर जी हांगा करके चली गई वो त्रिया आली जिद करगी । बाप के घरा पति की बेड़ज्जती देख कै कुण्ड में जल भर कैलाशपति की बात टाल कै के सुख पाई पार्वती ।।
4. गुरु संदीपन नै भेज दिये हम एक दिन लकड़ी लाने नै। चने जेब में घाल दिये मेरे रास्ते बीच चबाने नै। रात हुई जब मांगन लाग्या कृष्ण साथी खाने नै। मैं बोला मेरी जाड़ी बाजै कृष्ण मिला बहकाने नै। हेरा फेरी करी भगवन तै ज्यां ते होगी दुर्गति।।
5. तू नहीं मानती तो मैं तड़के कृष्ण धोरे जाऊंगा। द्वारकापुरी में राज करै जै जाके शीश झुकाऊंगा। जाने सै के भूल गया तेरा यो भी भरम मिटाऊंगा। खाली पत्लै जाके नै मैं क्यू कर मुंह दिखलाऊंगा। कह शर्मा भगवान रुस ज्या तो चीज उधारी ना मिलती ॥।
भजन-233
टेक:- लाल चला माँ नै छोड़ कै रे, हे रे तेरे क्यू कर मन में आईं। मात मैं तो भक्ति करूंगा री, हे री मेरी सुनले जननी माई।।
1. बालक उम्र नादान तेरी, हे रे मुश्किल से मिलनी राही। धुव ने बालेपन में री, हे री उसने ढूंढ लिये रघुराई।।
2. सरूपी बाहण तेरी से रे, हे रे वा रोबैगी माँ जाई। मात मत मोह में डालै री, हे री उसके चन्दू और मोती भाईँ।
3. लाल तेरा ब्याह करवा दूं रे, है रे तेरी ल्यादूं ब्याह रे सगाई मात मेरी दुनिया खपगी री, है री भा पैड़ उपरली थ्याई ।।
4. मैं क्यूकर सबर करूंगी रे, हे रे मनै ओटी खुब तवाई। मात मेरी राभ रटें जाइये, हे री तेरी होज्या कला सवाई।।
5. लाल किस रंज नै खाया रे, हे रे मनै कौनसी बता दवाई। शरण सतगुरु की जाण दे री, हे री उड़े वैद्य मिलेंगे कन्हाई।।
6. शरण सतगुरु की जाइये रे, हे रे तेरी टेर सुनै रघुराई। फेर यो कृष्ण ब्राह्मण रे, हे रे तेरी गावैगा कविताई ।। फिर यो सत्संग मंडल रे, हे रे तेरी गावैगा कविताई।।
भजन-234
( तर्ज:- आज रल मिल कट्टी सारी )
टेक:- रटले ओम् हरि का नाम, सारी विपत मिटावैगा।
1. अन्न धन के भंडारे भरदे, अगली पिछली काढ़ कसर दे। कर दे सिद्ध वह सारे काम, नैया पार लगावैगा।
2. तुरिया पद में आसन लाकै, बैठज्या सच्चा ध्यान जमाकै आकै दर्शन दे घनश्याम, बिगड़ी बात बनावैगा।
3. हरि भजन का देख नतीजा, रट माला आधार से जीज्या। पीज्या हरि 3» का जाम, जीवन जोत जगावैगा।
4. भजन कीर्तन जै नित गावै, चन्द्रभान सन्त रंग छावै। पावै सत् चित् आनन्द धाम, फंद गल का कट जावेगा।
दोहा:- गुरु को करिये वन्दना, भाव से बारम्बार। नाम सु नौका से किया, भवसागर से पार ।।
भजन-235
( तर्ज:- झूठा जग का खेल )
टेक:- बनग्या क्यूं नादान, ध्यान कर आगे का।
1. काम करे सब यहां बेफायदा, नेम टेम भूला सब वायदा। गूंगी हुई जबान, ध्यान कर आगे का।
2. नशा विषयों का चढ़ग्या गहरा, जान बूझ क्यूं होग्या बहरा। ल्या खोलूं तेरे कान, ध्यान कर आगे का।
3. धर्म कर्म से आँख मीच ली, भजन करन की आन खींच ली। चढ़ग्या सिर शैतान, ध्यान कर आगे का।
4. सत्संग में जा शाम सवेरी, परम गति हो ज्यागी तेरी। लगज्या सही मिजान, ध्यान कर आगे का।
5. चन्द्रभान सन्त बतलावैं, रोग दोष संकट मिट जावें। रट कृष्ण भगवान, ध्यान कर आगे का।
दोहा: - सच्चे सन्त की शरण में, बैठ मिले विश्राम। मन मांगा फल तब मिलै, जपै राम का नाम ।।
भजन – 236
टेक:- राम रटे सुख धाम मिलै या अगत कमाई हो ज्यागी। हृद्य के मा जख्म तेरे की खास दवाई हो ज्यागी
1. दसों इन्द्री बस में करकै राम रटन की ले माला । काम क्रोध मद्य लोभ मोह तजन का धाला। भगवान भक्त के वश में हों ना एक मिनट । हो ढाला। दर्शन दें घनश्याम आप वो मन मोहन बं' का हो टाला। प्रेम की पाती लिख भेजे तो हरि मिलाई हो ज्यागी।।
2. सत् चित आनन्द कन्द मिलै जो सच्चे मन तैं टेर करै। जिसा काम हो दाम भी वैसे बिल्कुल ना हथ फेर करै। कीड़ी ने कण हाथी ने मन दे कै सबकी मेर करै। गरुड़ छोड़ भाज्या आवै पल भर की ना देर करै। भीड़ पड़ी में सच्चा साथी तेरी सहाई हो ज्यागी॥
3. लाख चौरासी जीया-जून के जीवन का आधार वही। खालिक, मालिक, राजिक रक्षक सबका पालन हार वही। आदि अनादि वही अन्त है खेल रचै हर बार वही। सच्चे मन तैं करै विनती आकर सुनै पुकार वही । लगै कचहरी बिना गवाह तेरी आप सुनाई हो ज्यागी।।
4. करी तपस्या लीन मगन हो हरि भजन में ध्यान धरा। वचन भरा कै न्यूं बोल्या हो तेरे जैसा पूत खरा | लेना पड़ा जन्म दशरथ घर खुद विष्णुं जी आन घिरा। चन्द्रभान सन्त बतलावेँ नाम रटे जा पाप हरा। सत्संग में कर भजन कीर्तन पाप सफाई हो ज्यागी॥
भजन-237
( तर्ज: - दर पै सन्तां के जाकै )
टेक:- सत्संग के मां जां सूं बहना, हे तुम भी चालो । हे सब पाप नष्ट हों, वहां बिन साबुन बिन तेल ।।
।. सत्संग के मां बैठ कै बहना, हे प्रभु के गुण गाइ़ये। हरि नाम की गंगा बह रही, दिन खोल कै गोता लाड़ये। मोक्ष पदी पद जै तनै चाहिये, तो कर सन्तों से मेल ॥
2. मनुष जन्म मुश्किल तैं मिलता, तू जीवन सफल बनाले। हरि ओम रटकै बहना तू, जै सन्त रसायन खाले। भर भक्ति भाड़ा टिकट कटाले, या खड़ी गुरु की रेल॥
3. गाम गिरावड़ तैं आ रहे सैं, म्हारे गुरुदेव हितकारी। बच्चेपन तैं भजन करें सैं, सैं पूरे चमत्कारी । मंगल भवन अमंगल हारी, तु देख चरण में खेल ॥
4. श्री चन्द्रभान सन्त की सेवा, हे करता सुगन चन्द सै। सदाब्रत बटे फिर भी भूखी, तो भाग तेरे अति मन्द सै । वन्य रहे सबका प्रबन्ध सैं, क्यूं कर रही धक्का पेल॥ दोहा: एक घड़ी का मोल ना, दिन का कहां बखान। सहजा ताहि न खोइये, बिना भजन भगवान ।।
भजन-238
( तर्ज:- हां ए कर ख्याल अगत का बहना )
टेक:- आं ए तने इतना नेम पुगाना जै ल्यावे तस्वीर सन्त की।
1. शुद्ध जगह ले जाके रख दिये, माला के तु गल नै भर लिये। आं ए बिस्तर से शीश झुकाना, जै ल्यावै तस्वीर ...
2. उठ सवेरे घूमण जावे, आकै ने शुद्ध जल तैं ावै। आं ए फिर घी की जोत जलाना, जै ल्यावे तस्वीर...
3. धूप की बती आगे जला कै, बैठ ज्या फिर आसन लाकै। आं ए फिर सन्त चालीसा गाना, जै ल्याबे तस्वीर...
4. गुरु मन्त्र की जो ले रही माला, करियो जाप ना करियो टाला। आं ए फिर शब्द एक दो गाना, जै ल्यावै तस्वीर...
5. शब्द बधाई प्रेम तैं गाव, गुरु आरती गा सुख पावै। आं ए फिर जय का नारा लाना, जै ल्यावै तस्वीर...
6. महाबीर तने समझावै, आदर करिये जै सुख चाहवै। आं ए फिर धाम गुरु के आना, जै ल्यावै तस्वीर...
भजन-239
( तर्ज:- सादा )
टेक:- प्रथम सतगुरु देव मनाईये, मनवांछित फल इनसे पाइए।
1. विघ्न हरन मंगल के दाता, गुरु जी ब्रह्म के हो सै ज्ञाता ब्रह्म विष्णुं देव मनाईये। प्रथम:.....
2. महिमा इनकी सकल जगत मे कर राखै सब देवन वश मे चमत्कारी गुरुदेव मनाइयें । प्रथम:.....
3. सत्संग में आ शाम सवेरी, परमगति हो ज्यागी रथ 7 ल् ब्रह्मचारी गुरुदेव मनाइये । प्रथम: ...,
4. श्री गुरूदेव जी करें ऐलान हैं, सत्संग से मिलते भगवान हैं। हम सब के गुरुदेव मनाइ़ये । प्रथम: ...
भजन-240
( तर्ज:- मैं सन्त नाम का मस्ताना )
टेक:- यह शुभ दिन आज का प्यारा है, किसा हो रहा अजब नजारा है। किसा हो रहा अजब नजारा है॥।
1. यहां देव फूल बरसाते हैं, सन्तों की महिमा गाते हैं। एक खिलग्या चमन हजारा है, किसा हो रहा...
2. बैकुण्ठ बनी जुलाना मंडी, जहां फरकै सन्तां की झंडी। विष्णु सा बना द्वारा है, किसा हो रहा...
3. यहां रोग दोष सारे मिटते, हैं दर्शन से सब फंद कटते। दुखियों का एक सहारा है, किसा हो रहा...
4. सन्त हरि के हों जामन, जहां सन्त रहें वहां हों भगवन। वेदों ने यही उचारा है, किसा हो रहा...
5. चन्द्रभान सन्त की युक्ति, सत्संग में नहा होज्या मुक्ति । यहां बहती निर्मल धारा है, किसा हो रहा... दोहा: लेने को हरि नाम, देने को अभय दान। तिरने को आधीनता, डूबन को अभिमान।॥।
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